के.एल. विश्वविद्यालय के छात्रों ने रचा इतिहास – एक साथ तीन सैटेलाइट किया लॉन्च


KL University ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा तैयार किए गए तीन सैटेलाइट शनिवार को स??

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आंध्र प्रदेश के वद्देश्वरम स्थित KL University ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा तैयार किए गए तीन सैटेलाइट शनिवार को सफलतापूर्वक लॉन्च किए गए। इस मौके पर केंद्रीय इस्पात और हैवी उद्योग (Union Minister of State for Steel and Heavy Industries) राज्य मंत्री भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और छात्रों को बधाई दी।

छात्रों ने दिखाया इनोवेशन का कमाल

के.एल. यूनिवर्सिटी, Best Universities in India, के छात्रों द्वारा बनाए गए तीन सैटेलाइट — CAN SAT, KL SAT-2, और KL ZAC — लॉन्च किए गए। इनमें से CAN SAT को ‘Make in India’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ प्रतियोगिता के लिए चुना गया है, जो 27 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में होने वाली है। यह सैटेलाइट आंध्र प्रदेश से चुना गया एकमात्र छात्र सैटेलाइट है जिसे भारतीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe), ISRO और एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) ने अंतिम परीक्षणों के लिए चुना है।

ISRO दे रहा है विश्वविद्यालयों को सहयोग

इस मौके पर मंत्री श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि आज के समय में देश को तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ISRO कई विश्वविद्यालयों को अनुसंधान कार्यों के लिए धन मुहैया करा रहा है, ताकि देश में स्वदेशी तकनीकों का विकास हो सके।

उन्होंने कहा, “हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में रिसर्च को बढ़ावा देना चाहिए। तभी भारत दुनिया के अन्य देशों से तकनीकी स्तर पर प्रतिस्पर्धा (Competition) कर सकेगा।”

KL SAT-2 और KL ZAC – नई तकनीक की झलक

KL SAT-2 पहले संस्करण KL SAT-1 का उन्नत रूप है। यह सैटेलाइट वैज्ञानिक शोध, रीयल-टाइम कम्युनिकेशन और पर्यावरण निगरानी के लिए तैयार किया गया है। वहीं KL ZAC देश का सबसे हल्का सैटेलाइट है, जिसे पूरी तरह छात्रों ने डिजाइन और तैयार किया है।

विश्वविद्यालय की अनुसंधान टीम ने बताया कि KL SAT-2 लगभग डेढ़ घंटे तक हवा में रहा। इसने धरती के गुरुत्वाकर्षण को पार करते हुए 12 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी और लगभग 60 किलोमीटर तक का सफर तय किया। इस दौरान इसने वायुमंडल में हो रहे बदलावों और ओज़ोन परत से जुड़ी जानकारियां एकत्र कीं। लगभग एक घंटे बाद यह सैटेलाइट सुरक्षित रूप से लॉन्च पैड पर वापस आ गया।

टीम की डिज़ाइनर के.सी.एच. श्रीकाव्या ने बताया कि यह प्रयोगगन्नवरम और चेन्नई एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अनुमति से किया गया था।

छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत

आंध्र प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष के. रघु रामकृष्ण राजू ने भी इस मौके पर छात्रों की सराहना की। उन्होंने कहा, “देश की तरक्की में युवाओं का योगदान सबसे अहम है। छात्र रिसर्च के माध्यम से भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।”

विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष कोनेरु निखिल कार्तिकेयन, कुलपति जी. पार्थसारथी वर्मा, प्रो-वाइस चांसलर ए.वी.एस. प्रसाद, एन. वेंकट राम, के. राजशेखर राव, रजिस्ट्रार के. सुब्बाराव, और अनुसंधान एवं विकास के डीन बी.टी.पी. माधव तथा डीन - इंटरनेशनल रिलेशन, डॉ. किशोर बाबू सहित सभी विभागों के डीन, निदेशक और विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

के.एल. विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। इन तीन सैटेलाइटों का डिजाइन और निर्माण छात्रों ने खुद किया है, जो यह साबित करता है कि भारत के युवा वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन के दम पर नई उड़ान भरने को तैयार हैं।

यह लॉन्च न सिर्फ के.एल. विश्वविद्यालय बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।

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